अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े कथित दान अनियमितता विवाद को लेकर अयोध्या में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। बड़ी संख्या में वकीलों ने सड़क पर उतरकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई, जिससे मौके पर कुछ देर के लिए तनाव का माहौल पैदा हो गया।
कलेक्ट्रेट तक निकाला विरोध मार्च
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने शहर में मार्च निकालते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि दान राशि से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब जिम्मेदार पदों पर रहे लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जुलूस को नियंत्रित करने का प्रयास किया, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली।
FIR दर्ज करने की मांग
वकीलों का कहना है कि मामले की जांच केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। अधिवक्ताओं का आरोप है कि यदि पूरे मामले की गहराई से जांच नहीं हुई तो वास्तविक जिम्मेदारों तक पहुंचना संभव नहीं होगा।
CBI जांच की भी उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने पूरे प्रकरण की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) से कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। यदि आवश्यक हुआ तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं बड़े घटनाक्रम
हाल के दिनों में राम मंदिर दान मामले में कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इसी बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे भी चर्चा का विषय बने थे। ट्रस्ट ने कहा था कि वह निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करेगा और दान राशि सुरक्षित है।
प्रशासन की नजर
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस अधिकारियों ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन की ओर से स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है, जबकि अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों पर कार्रवाई न होने की स्थिति में आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।








