आतंकवाद को बर्दाश्त न करने पर काम करें भारत व इजरायल

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नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इजरायल के साथ संबंधों को परस्पर विश्वास पर आधारित बताते हुए गाजा शांति योजना की बात दोहराई है। जयशंकर ने साथ ही कहा है कि यह आवश्यक है कि भारत और इजरायल आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य-सहिष्णुता के वैश्विक दृष्टिकोण को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करें।

जयशंकर ने 4 नवंबर को भारत के आधिकारिक दौरे पर आए इजरायल के अपने समकक्ष गिदोन सा’र के साथ बैठक के दौरान अपने प्रारंभिक वक्तव्य में यह टिप्पणी की। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, डॉ. जयशंकर ने कहा हम कठिन समय में एक साथ खड़े रहे हैं और हमने उच्च स्तर के विश्वास और विश्वसनीयता के साथ एक रिश्ता बनाया है।

विदेश मंत्री ने कहा हमारे व्यवसाय इजरायल में अवसरों का पता लगाने के लिए बहुत उत्सुक हैं और हम निश्चित रूप से इस पर अधिक ध्यान देना चाहेंगे। कृषि और नवाचार में साथ मिलकर काम करने का हमारा एक बहुत ही मजबूत रिकॉर्ड है। इसे आगे बढ़ाना हमारे पारस्परिक हित में है। सेमीकंडक्टर और साइबर क्षेत्र में सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। यह अब और भी प्रासंगिक हो गया है।

बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा विभिन्न क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सार्थक चर्चा हुई। आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता की पुष्टि की। क्षेत्र के घटनाक्रमों, गाजा शांति योजना और एक स्थायी समाधान के निर्माण के प्रयासों पर इजरायली दृष्टिकोण साझा करने के लिए विदेश मंत्री की सराहना की। बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और इजरायल विदेश मंत्रालय के बीच प्रशिक्षण पर एमओयू के आदान-प्रदान का भी साक्षी रहा।

इजरायली विदेश मंत्री ने कहा हमारा लक्ष्य दोनों देशों के बीच एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी बनाना है। हम इसे पूरा करेंगे। इजरायल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारत का खुले दिल से समर्थन किया था। दोनों ही देश आतंक से पीड़ित हैं। ऐसे में दोनों ही देश आतंक पर एक राय बनाते हुए नजर आते हैं।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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