बिम्सटेक-भारत मरीन रिसर्च नेटवर्क’ सम्मेलन का कोच्चि में आयोजन

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कोच्चि । बिम्सटेक-भारत समुद्री अनुसंधान नेटवर्क का कोच्चि में सफलापूर्वक समाप्त हुआ। इस तीन दिवसीय सम्मेलन से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत के ब्लू इकोनॉमी सहयोग को बल मिलने की उम्मीद है। यह पहला द्विवार्षिक सम्मेलन था, जो कि विदेश मंत्रालय की एक पहल के तहत 2024 में अस्तित्व में आया था।

बिम्सटेक देशों के साथ अनुसंधान सहयोग को मिलेगी नई दिशा

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा यह जुड़वां अनुसंधान अनुदानों और विभाजित-स्थल पीएचडी फेलोशिप के माध्यम से संस्थागत सहयोग को सक्षम बनाता है, जिससे प्रमुख भारतीय अनुसंधान संस्थानों को अन्य बिम्सटेक देशों के साथ जोड़ा जा सके। समुद्री विज्ञान में सामूहिक अनुसंधान को मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में कोलंबो बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान बिमरेन पहल की घोषणा की थी। यह भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘इंडो-पैसिफिक’ और महासागर रणनीतियों के तहत व्यापक क्षेत्रीय नीति उद्देश्यों के अनुरूप है।

बिम्सटेक-भारत मरीन रिसर्च नेटवर्क के भागीदारों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इससे जुड़ी गतिविधियों के परिणामों पर चर्चा की। इसके पायलट चरण ने अब तक बिम्सटेक देशों के 25 संस्थानों और 50 से अधिक शोधकर्ताओं को जोड़ा है। यह आयोजन समुद्री अनुसंधान और सतत नीली अर्थव्यवस्था पहलों में क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जो समुद्री चुनौतियों, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और अनुसंधान नवाचारों पर केंद्रित रहा, जिसमें युवा शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक नेटवर्क का निर्माण, प्रभावी समुद्री संसाधन प्रबंधन और सामंजस्यपूर्ण नीति विकास शामिल था।

भारत द्वारा इस पहल का शुभारंभ बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से सतत मत्स्य प्रबंधन के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जहां दुनिया की 6% मछलियां पकड़ी जाती हैं और दुनिया के एक तिहाई से अधिक मछली पकड़ने वाले बेड़े इसके आसपास चलते हैं।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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