बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर बड़ा हमला, अस्पताल अलर्ट पर और हाईवे बंद

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सेना के काफिले पर हुए बड़े हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मस्तुंग जिले में हुए इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने ली है। संगठन ने 45 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है, लेकिन पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

हमले के बाद मस्तुंग और आसपास के इलाकों में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करने के साथ ही क्वेटा-कराची राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों पर यातायात रोक दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रास्तों को बंद करने का उद्देश्य राहत कार्यों और सुरक्षा अभियान को बिना किसी बाधा के पूरा करना है।

छुट्टी पर जा रहे सैनिकों का काफिला बना निशाना

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के जवान करीब दस बसों के काफिले में यात्रा कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इनमें अधिकतर सैनिक छुट्टी पर अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने काफिले को निशाना बनाया।

बीएलए का दावा है कि हमले में सैन्य काफिले के साथ उसकी मदद के लिए पहुंची अतिरिक्त सुरक्षा टुकड़ियों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि संगठन के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी सेना ने केवल काफिले पर हमला होने और इसके बाद राहत एवं सुरक्षा अभियान शुरू किए जाने की जानकारी स्वीकार की है।

क्वेटा के अस्पतालों में मेडिकल इमरजेंसी

घटना के बाद बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के कई प्रमुख अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। सिविल हॉस्पिटल क्वेटा और घौस बख्श रायसानी मेमोरियल हॉस्पिटल सहित आसपास के चिकित्सा केंद्रों में मेडिकल इमरजेंसी घोषित की गई।

हमले में घायल हुए सुरक्षा कर्मियों को एंबुलेंस के माध्यम से मस्तुंग से अस्पताल पहुंचाया गया। राहत अभियान में हेलीकॉप्टर गनशिप की मदद भी ली गई। हेलीकॉप्टरों के जरिए घायलों को निकालने और इलाके में तैनात जवानों तक सहायता पहुंचाने का काम किया गया।

पाकिस्तान की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हमले में कितने सैनिक घायल हुए हैं और कितने लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

पूरे इलाके में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन

हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों को घेर लिया। हमलावरों की तलाश में बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। संवेदनशील स्थानों, सैन्य प्रतिष्ठानों और प्रमुख मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है।

क्वेटा-कराची हाईवे पर आवाजाही रोकने से स्थानीय लोगों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षा अभियान पूरा होने तक प्रभावित रास्तों से दूर रहने की अपील की है।

हेलीकॉप्टरों की तैनाती, अस्पतालों में आपातकाल और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से संकेत मिलता है कि पाकिस्तानी प्रशासन इस हमले को बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है।

बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा

मस्तुंग में यह हमला ऐसे समय हुआ है जब बलूचिस्तान में सेना और अलगाववादी संगठनों के बीच संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान सैन्य चौकियों, सरकारी प्रतिष्ठानों, काफिलों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आई हैं।

बीएलए लंबे समय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय अधिकार की मांग करता रहा है। पाकिस्तान ने संगठन को प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है और उस पर देश में हिंसक हमले करने का आरोप लगाता है।

दूसरी ओर, बलूच संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ स्थानीय आबादी तक नहीं पहुंच रहा और उनके राजनीतिक अधिकारों को दबाया जा रहा है। इन आरोपों के कारण बलूचिस्तान में लंबे समय से असंतोष और हिंसा बनी हुई है।

पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सेना के इतने बड़े काफिले पर हमला पाकिस्तानी सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। बलूचिस्तान पहले से ही पाकिस्तान का सबसे संवेदनशील प्रांत है, जहां सेना और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती रहती है।

इसके बावजूद सैन्य काफिले को निशाना बनाए जाने से खुफिया और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना बताती है कि क्षेत्र में सक्रिय हथियारबंद संगठन अभी भी बड़े और योजनाबद्ध हमले करने की क्षमता रखते हैं।

फिलहाल हमले में हुए वास्तविक नुकसान की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। बीएलए ने 45 से अधिक सैनिकों की मौत का दावा किया है, जबकि पाकिस्तानी सेना ने मृतकों या घायलों की संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए मृतकों से संबंधित दावे को अभी पुष्ट आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

 

 

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