संसद के मॉनसून सत्र में मंगलवार को सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया, जब बीजेपी सांसदों ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को सीधे निशाने पर ले लिया। सांसदों ने सवाल उठाया कि आखिर प्रियंका गांधी झारखंड क्यों नहीं गईं और वे वहां के छात्रों के मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। इस तीखे सवाल का प्रियंका गांधी ने भी करारा जवाब दिया।
मॉनसून सत्र का 17वां दिन, आखिरी दिनों में तेज हुई गहमागहमी
मंगलवार को मॉनसून सत्र का 17वां दिन था। यह सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को खत्म होना है, यानी अब सत्र में सिर्फ दो-तीन दिन ही शेष बचे हैं, जिस वजह से आज का दिन खासा अहम माना जा रहा था। सत्र शुरू होने से पहले संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने मार्च निकाला और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोला। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने भी संसद परिसर में अपना विरोध प्रदर्शन किया। इस तरह सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों आमने-सामने नजर आए।
प्रियंका गांधी को घेरने की कोशिश, राहुल की मुलाकात का दिया हवाला
इसी बीच संसद परिसर में बीजेपी सांसदों ने प्रियंका गांधी को घेरते हुए झारखंड में छात्रों के मुद्दे पर सवाल दागे। सांसदों का कहना था कि झारखंड में जब छात्र लगातार आंदोलनरत हैं, तब प्रियंका गांधी वहां जाकर उनसे मुलाकात क्यों नहीं करतीं और इस पूरे मसले पर खामोश क्यों हैं।
इसके जवाब में प्रियंका गांधी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं, इसलिए पार्टी की तरफ से इस मुद्दे पर पहले ही ठोस कदम उठाए जा चुके हैं।
विपक्ष के हंगामे से बाधित हुई संसद की कार्यवाही
गौरतलब है कि मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार हंगामे की वजह से कई दिनों तक प्रश्नकाल पूरी तरह संचालित नहीं हो सका और सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ा। सोमवार यानी 10 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 11 बजे तक के लिए रोक दी गई थी। मंगलवार को भी दोनों सदन सुबह 11 बजे से फिर शुरू होने वाले थे।
एनडीए सांसदों की रणनीतिक बैठक
इसी दिन सुबह एनडीए सांसदों की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत अन्य एनडीए सांसद शामिल हुए। बैठक में सत्र के बचे हुए आखिरी दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा सदन को सुचारू रूप से चलाने और विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों पर भी मंथन किया गया। सांसदों को निर्देश दिया गया कि वे एकजुट रहें और जरूरी विधेयकों को पारित कराने में सरकार का पूरा साथ दें।








