46 साल बाद अंतरिक्ष में नया इतिहास रचने को तैयार भारत, निजी रॉकेट विक्रम-1 भरेगा उड़ान

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श्रीहरिकोटा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के पहले प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) की ऐतिहासिक उड़ान के 46 वर्ष बाद अब निजी क्षेत्र का रॉकेट विक्रम-1 अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरने के लिए तैयार है। यह मिशन भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर तैयार किया गया ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इस मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है। सफल प्रक्षेपण के साथ भारत वैश्विक निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाएगा।

यह रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि इसी अंतरिक्ष केंद्र से वर्ष 1980 में भारत का पहला स्वदेशी SLV-3 रॉकेट भी लॉन्च हुआ था। इस कारण यह मिशन भारत की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक महत्व रखता है।

विक्रम-1 को छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें कई तकनीकी प्रदर्शन पेलोड भी शामिल हैं, जो रॉकेट की विभिन्न प्रणालियों की क्षमता का परीक्षण करेंगे। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भविष्य में स्काईरूट व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं का विस्तार करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी भारत की स्पेस इकोनॉमी को नई गति दे सकती है। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों के बाद निजी कंपनियों को अंतरिक्ष मिशनों में अधिक अवसर मिलने लगे हैं और विक्रम-1 उसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मिशन को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए “ऐतिहासिक नई शुरुआत” बताया और कहा कि यह देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की क्षमता का प्रतीक है।

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