केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई नई सड़क परियोजना नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक विवाद है। गडकरी ने मुंबई की बॉम्बे हाईकोर्ट में करीब 86 पन्नों की एक विस्तृत याचिका दाखिल कराई है, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने वाली चर्चित E20 योजना से उनका कोई प्रत्यक्ष लेना-देना नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें घूम रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि गडकरी की वजह से गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचाने वाली E20 पॉलिसी लागू हुई है। कुछ पोस्ट्स में तो उनके परिवार पर भी इस योजना से नाजायज फायदा उठाने के आरोप लगाए गए। गडकरी का कहना है कि यह पूरी तरह गुमराह करने वाली जानकारी है, क्योंकि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि सड़क परिवहन मंत्रालय के।
2003 से शुरू हुआ सफर, अब पहुंचा 20% तक
याचिका के मुताबिक इथेनॉल मिलाने की यह नीति करीब दो दशक पुरानी है — 2003 में इसकी शुरुआत हुई थी और धीरे-धीरे यह बढ़ते हुए 2025-26 में 20 प्रतिशत के आंकड़े तक जा पहुंची। गडकरी का तर्क है कि इस लंबी प्रक्रिया को लेकर उन्हें अकेले निशाना बनाना अनुचित है।
टेक कंपनियों समेत कई पक्ष कठघरे में
इस याचिका में सिर्फ अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स को ही पार्टी नहीं बनाया गया, बल्कि मेटा, एक्स (पहले ट्विटर), गूगल, यूट्यूब के अलावा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स-आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी शामिल किया गया है। गडकरी की टीम ने अदालत से गुजारिश की है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद फर्जी कंटेंट को तुरंत हटवाया जाए।
आर्थिक नुकसान और मानहानि की भरपाई के तौर पर 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी सामने रखी गई है।
26 लिंक, फेस-स्वैप और AI कार्टून का जिक्र
सबसे दिलचस्प बात यह है कि याचिका में करीब 26 विशिष्ट लिंक का हवाला दिया गया है, जिनमें फेस-स्वैप तकनीक से बने वीडियो, AI जनरेटेड तस्वीरें और कार्टून शामिल हैं। गडकरी का आरोप है कि इनमें बिना किसी अनुमति के उनकी आवाज, चेहरे और अंदाज़ की नकल कर आम जनता को गुमराह किया गया — जिसे कानूनी भाषा में उनके “पर्सनैलिटी राइट्स” यानी व्यक्तित्व अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
आलोचना से परहेज नहीं, लेकिन झूठ बर्दाश्त नहीं
गडकरी ने अपनी याचिका में यह स्पष्ट किया है कि वे अपनी नीतियों की जायज आलोचना या व्यंग्य के खिलाफ नहीं हैं — लोकतंत्र में यह स्वाभाविक है। लेकिन जिन पोस्ट्स पर एतराज जताया गया है, उनमें अपमानजनक भाषा और मनगढ़ंत तथ्य शामिल हैं, जो सामान्य राजनीतिक टिप्पणी की सीमा लांघ चुके हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस आरिफ एस डॉक्टर की बेंच में होनी है, जहां वकील संदीप लड्ढा गडकरी की तरफ से पक्ष रखेंगे।








