नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों तक चले अनशन के समाप्त होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जन आंदोलनों में केवल फैसले ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रस्तुत करने का तरीका भी काफी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने इशारों में कहा कि राजनीति में “ऑप्टिक्स”, यानी किसी घटना का जनता के बीच जाने वाला संदेश, भी अहम भूमिका निभाता है।
क्या कहा महुआ मोइत्रा ने?
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि अनशन समाप्त कराने का फैसला लिया गया था, तो इसे किसी ऐसे व्यक्ति के माध्यम से कराया जा सकता था जिससे आंदोलन की निष्पक्षता पर सवाल न उठते। उनका मानना है कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा वांगचुक का अनशन तुड़वाने की तस्वीरें कई तरह के राजनीतिक संदेश देती हैं, जिनसे आंदोलन की धार प्रभावित हो सकती है।
26 दिन बाद खत्म हुआ अनशन
सोनम वांगचुक पिछले 26 दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET परीक्षा से जुड़े विवादों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। सरकार और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद उन्होंने अपना उपवास समाप्त करने का फैसला लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन खत्म हुआ है, लेकिन आंदोलन अभी जारी रहेगा और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
सरकार ने दिए आश्वासन
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने आंदोलनकारियों की कुछ प्रमुख चिंताओं पर सकारात्मक रुख दिखाया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं करने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा का भरोसा दिए जाने के बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया।
आंदोलन रहेगा जारी
वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग का है। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
राजनीतिक बहस तेज
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है। एक पक्ष इसे सरकार की सकारात्मक पहल बता रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि ऐसे आंदोलनों को राजनीतिक संदेश देने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।








