तेहरान: दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान की एक नई योजना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने प्रस्ताव रखा है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से 7 प्रतिशत तक शिपिंग शुल्क वसूला जाए। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन लागत पर पड़ सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित कर सकता है।
क्या है ईरान की योजना?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 5 से 7 प्रतिशत तक ट्रांजिट शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य समुद्री मार्ग से होने वाले आवागमन पर अधिक नियंत्रण स्थापित करना और राजस्व बढ़ाना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
यदि यह शुल्क लागू किया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। इसका असर कच्चे तेल, गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य आयात-निर्यात होने वाले सामानों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई शिपिंग लागत अंततः उपभोक्ताओं तक महंगाई के रूप में पहुंच सकती है।
ऊर्जा बाजार की बढ़ी चिंता
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का नया शुल्क या प्रशासनिक बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है। तेल आयात पर निर्भर देशों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान इस प्रस्ताव को लागू करता है तो कई देश और शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर सकती हैं। हालांकि, हॉर्मुज जैसा सुविधाजनक और रणनीतिक समुद्री मार्ग फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है।







