इबोला प्रकोप: ‘ग्लोबल साउथ’ की सुरक्षा के लिए भारत ने फिर पेश की मिसाल

नई दिल्ली। भारत ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अन्य अफ्रीकी देशों में जानलेवा इबोला प्रकोप से निपटने के लिए अफ्रीका सीडीसी को 43 टन चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है। भारत का यह कदम ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक और मानवीय प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कह भारत ने अफ्रीकी संघ आयोग से मिले एक अनुरोध के जवाब में, अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) को उनके इबोला प्रतिक्रिया प्रयासों में सहायता देने के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की है। तत्काल प्रतिक्रिया के तौर पर, लगभग 2.5 टन की तत्काल चिकित्सा सामग्री की पहली खेप 24 मई 2026 को युगांडा के कंपाला भेजी गई। इस खेप में सुरक्षात्मक गियर, चिकित्सा निगरानी उपकरण, आवश्यक दवाएं और सप्लीमेंट्स शामिल थे।

मंत्रालय ने आगे कहा अफ्रीका सीडीसी से जरूरतों की अधिक विस्तृत सूची मिलने के बाद, विदेश मंत्रालय ने अब 43 टन की एक बड़ी दूसरी खेप तैयार की है। इस खेप में सुरक्षात्मक गियर, निदान/निगरानी उपकरण, नमूना परिवहन किट, संक्रमण रोकथाम सामग्री, दवाएं और सप्लीमेंट्स शामिल हैं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अफ्रीका भेजी जा रही सामग्री की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी और पूरे अफ्रीकी संघ में इबोला से निपटने की क्षमताओं को बढ़ाएगी

भारत और अफ्रीका के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से आपसी विश्वास और विकास साझेदारी पर आधारित रहे हैं। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे जी20 और संयुक्त राष्ट्र) पर अफ्रीकी देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को प्रमुखता से उठाता रहा है। कोविड महामारी के दौरान भी भारत ने ग्लोबल साउथ, खासकर अफ्रीकी देशों की बड़ी मदद की थी। संकट के समय अफ्रीका की मदद करना भारत की उस सोच का हिस्सा है, जहां वह खुद को ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के एक विश्वसनीय और जिम्मेदार मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करता है।

इसकी बानगी दक्षिण अफ्रीका के उप राष्ट्रपति शिपकोसा पॉलस माशातिले और उनके प्रतिनिधिमंडल के नई दिल्ली पहुंचने पर भी दिखी, जब डॉ. जयशंकर मंगलवार को उनसे बड़े गर्मजोशी से मिले। उन्होंने इस मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और अधिक गहरा करने के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। हमने व्यापार, निवेश, एमएसएमई, डिजिटल और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में मौजूद अवसरों पर चर्चा की। इस बात पर भी सहमति बनी कि भारत और दक्षिण अफ्रीका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करना चाहिए।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)