अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड – SIT की 150 पन्नों की सीक्रेट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कई दिग्गज रडार पर!

दस्तक टुडे। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे (दान) और आभूषणों में हुई वित्तीय हेराफेरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी 150 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है. लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली 3 सदस्यीय एसआईटी टीम ने पिछले 6-7 दिनों में मैराथन जांच की, जिसमें 150 से अधिक लोगों से तीखी पूछताछ की गई और लगभग 25 से 30 लोगों की भूमिका को बेहद संदिग्ध पाया गया है.

एसआईटी की इस विस्फोटक रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए हैं, किन लोगों के नाम सामने आए हैं और सरकार क्या एक्शन लेने जा रही है, इस पर ‘दस्तक टुडे’ की यह विशेष कवरेज:

SIT की जांच में क्या-क्या गड़बड़ियां निकलीं?

जांच टीम ने मंदिर परिसर में वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर बेहद चौंकाने वाली कमियां उजागर की हैं:

दानपेटियों और चाबियों का खेल: मंदिर परिसर में लगी करीब 40 दानपेटियों से पैसे गायब हो रहे थे. रिपोर्ट में सामने आया कि ट्रस्ट का हिस्सा न होने के बावजूद निर्माण प्रभारी गोपाल राव वहां प्रबंधन देख रहे थे और दानपात्रों की मुख्य चाबियां टिन्नू यादव के पास रहती थीं.

गायब सीसीटीवी फुटेज: एसआईटी ने पाया कि मंदिर परिसर के कई महत्वपूर्ण कैमरों के सर्विलांस फुटेज गायब या डिलीट कर दिए गए हैं, जो अंदरूनी मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं.

60 किलो चांदी का कोई हिसाब नहीं: प्राण प्रतिष्ठा के समय ‘इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन’ द्वारा दान की गई 60 किलो चांदी की सिल्लियों (Silver Bars) का कोई रिकॉर्ड, रसीद या लेजर एंट्री ट्रस्ट के पास नहीं मिली.

अंधाधुंध नियुक्तियां और कैश रिकवरी: कम वेतन (18 से 20 हजार रुपये) पाने वाले कुछ कर्मचारियों के पास से अब तक करीब 2 करोड़ रुपये कैश, महंगी गाड़ियां और आईफोन बरामद हो चुके हैं. ये कर्मचारी दान की गिनती के बाद रकम सीधे बैंक न भेजकर पर्सनल अकाउंट्स और बेनामी जमीनों में लगा रहे थे.

 एसआईटी की रिपोर्ट किन-किन लोगों के नाम आए सामने?

एसआईटी की रिपोर्ट में और दर्ज कराई गई प्राथमिक शिकायतों में कई रसूखदार नाम संदेह के घेरे में हैं:

1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (मुख्य संदिग्ध): इन्हें ट्रस्ट के महासचिव चंपत रायका बेहद करीबी माना जाता है. टिन्नू यादव क पास दानपात्रों की चाबियां रहती थीं और इस कांड के बाद उनकी करीब 50 करोड़ की अघोषित संपत्ति का दावा जांच के केंद्र में है.

2. गोपाल राव (निर्माण प्रभारी): आधिकारिक रूप से ट्रस्ट के सदस्य न होने के बावजूद ये मंदिर के आंतरिक प्रबंधन और दान संग्रह की व्यवस्था में सीधे दखल दे रहे थे.

3. चंपत राय=(महासचिव, राम मंदिर ट्रस्ट) व डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी): शुरुआती रिपोर्ट में इन्हें सीधे तौर पर चोरी में नामजद नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही, इंटरनल ऑडिटर की चेतावनी वाली रिपोर्ट को दबाने और चोरों को खुला संरक्षण देने के मामले में एसआईटी ने इनके रोल को “अत्यंत संदिग्ध” माना है.

4. टिन्नू यादव समेत 4 नामजद कर्मचारी: लवकुश मिश्रा, अवनीश, अनुकल्प और करुणे जैसे कर्मचारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं, जो दान की रकम की शॉर्टिंग और काउंटिंग ड्यूटी में तैनात थे. इनके अलावा के.डी. तिवारी (सेवादार) और फरार चल रहे सोमेश आनंद व आनंद भी रडार पर हैं.

5. एसबीआई (SBI) व टीसीएस (TCS) स्टाफ: दान गिनने की प्रक्रिया में शामिल स्टेट बैंक के कुछ चुनिंदा कर्मचारी और सीसीटीवी व डिजिटल डेटा हैंडल करने वाली टीसीएस टीम के सदस्य भी जांच के दायरे में हैं.

क्या कार्रवाई की जाएगी? (योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान)

करोड़ों रामभक्तों की आस्था के इस केंद्र में हुई चोरी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त हैं और रिपोर्ट मिलते ही बड़े कानूनी व प्रशासनिक बदलावों को मंजूरी दी जा रही है:

एफआईआर (FIR) और सामूहिक गिरफ्तारियां: टिन्नू यादव समेत चिन्हित किए गए 80 से अधिक लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और धोखाधड़ी के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है.

अयोध्या छोड़ने पर लगी पाबंदी: एसआईटी के निर्देश पर ट्रस्ट से जुड़े सभी संदिग्ध पदाधिकारियों, कर्मचारियों और सेवादारों के अयोध्या से बाहर जाने पर तत्काल रोक लगा दी गई है ताकि कोई फरार न हो सके.

काशी विश्वनाथ की तर्ज पर IAS अधिकारी (CEO) की नियुक्ति: राम मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार बहुत जल्द एक सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात करने जा रही है. इसके बाद ट्रस्ट के मनमाने फैसलों पर सरकारी नियंत्रण हो जाएगा.

ट्रस्ट का पुनर्गठन (दिग्गजों की विदाई संभव): प्रशासनिक ढिलाई बरतने और आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट को नजरअंदाज करने के चलते चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को ट्रस्ट के अहम पदों से हटाया जा सकता है. एसआईटी ने मैनेजमेंट का पूरी तरह कॉपोरेट और पेशेवर आधुनिकीकरण करने की सिफारिश की है.

दान और गिनती का नया सिस्टम: पुरानी पूरी काउंटिंग टीम को बर्खास्त कर दिया गया है. अब नकदी निकालने से लेकर बैंक में जमा करने तक रोटेशन बेसिस पर कड़ी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और नए फॉरेंसिक सीसीटीवी सर्विलांस को एक्टिव किया गया है.

दस्तक टुडे का टेक: यह केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि सनातन आस्था पर बहुत बड़ा आघात है. एसआईटी की इस 150 पन्नों की रिपोर्ट के बाद अगले कुछ दिनों में अयोध्या में बड़े चेहरों की गिरफ्तारियां और एक बड़ा प्रशासनिक बुलडोजर एक्शन देखने को मिल सकता है.

~दस्तक टुडे