नोएडा,दिनांक: 24 जून, 2026। नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी के एक बेहद चौंकाने वाले मामले का भंडाफोड़ करते हुए एक पढ़े-लिखे MBBS और MD डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोपी डॉक्टर काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर ग्रेटर नोएडा की एक पॉश सोसाइटी में रहकर ठगी का साम्राज्य चला रहा था।
ठगी का तरीका ‘हनीट्रैप’ से ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ तक
साइबर क्राइम डीसीपी शैव्या गोयल के अनुसार, आरोपी की ठगी करने का तरीका बेहद शातिर था।
फर्जी प्रोफाइल: आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे FRND App) और विभिन्न डेटिंग साइटों पर ‘श्रीदेवी’ या अन्य महिला नामों से फर्जी प्रोफाइल बनाता था।
आवाज बदलना: वह वॉइस चेंजर सॉफ्टवेयर की मदद से लड़कियों की आवाज में पुरुषों से बात कर उन्हें अपने प्रेमजाल में फंसाता था।
मोटा मुनाफा: विश्वास जीतने के बाद वह पीड़ितों को एक फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के लिए उकसाता था और कम समय में भारी मुनाफे का लालच देता था।
म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल: ठगी की रकम को वह ऐसे मध्यस्थ (म्यूल) बैंक खातों में ट्रांसफर करवाता था, जहां इंटरनेट बैंकिंग के लिए उसका अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड था।
कुत्तों के खर्च और बेरोजगारी का बहाना
पुलिस पूछताछ में आरोपी डॉक्टर ने बताया कि एक निजी अस्पताल से नौकरी छूटने के बाद वह गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। उसने दावा किया कि खुद का और अपने दो पालतू कुत्तों (Pet Dogs) का खर्च उठाने के लिए उसने इस अपराध का रास्ता चुना। शुरुआती जांच में बेंगलुरु के एक निवासी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे दबोचा, जिससे अब तक करीब 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हो चुका है। पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी देश भर के कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
पुलिस जागरूकता कार्यक्रम से ही सीखे ठगी के गुर
हैरानी की बात यह है कि आरोपी डॉक्टर ने ठगी के ये तरीके किसी अपराधी से नहीं, बल्कि पुलिस के ही एक साइबर जागरूकता (Cyber Awareness) प्रोग्राम को देखने के बाद इंटरनेट और गूगल पर रिसर्च करके सीखे थे। पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी में इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। आरोपी के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
दस्तक टुडे की अपील: किसी भी अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल या डेटिंग ऐप पर मिलने वाले निवेश के सुझावों पर भरोसा न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
दस्तक टुडे, विशेष रिपोर्ट




