CJP आंदोलन से बदला सियासी समीकरण, संसद सत्र में विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का आंदोलन सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े सवालों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद के भीतर भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। विपक्षी दलों ने इसे केंद्र सरकार को घेरने का बड़ा अवसर मानते हुए एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगा है।

विपक्ष को मिला साझा मुद्दा

पिछले कुछ समय से अलग-अलग मुद्दों पर बंटा नजर आ रहा विपक्ष अब CJP आंदोलन के बहाने एक मंच पर दिखाई दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं की नाराजगी जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान देते हुए पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।

संसद के बाहर और भीतर दोनों जगह बढ़ा दबाव

संसद के पहले ही दिन दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। प्रदर्शनकारियों के “चलो संसद” मार्च को देखते हुए कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई। इसी दौरान सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों का ज्ञापन लिया। हालांकि आंदोलन की प्रमुख मांगों पर तत्काल कोई ठोस आश्वासन सामने नहीं आया।

सरकार का क्या है पक्ष?

सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रदर्शन को तय नियमों के तहत ही आयोजित किया जाना चाहिए। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।

राजनीतिक रणनीति पर बढ़ी चर्चा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आंदोलन संसद के मानसून सत्र का प्रमुख मुद्दा बन सकता है। यदि विपक्ष इस विषय पर एकजुट रहता है, तो आने वाले दिनों में सरकार को लगातार राजनीतिक और संसदीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सरकार की कोशिश होगी कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले और आंदोलन का असर सीमित रहे।

फिलहाल क्या स्थिति है?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। CJP नेतृत्व ने कहा है कि आंदोलन जारी रहेगा, जबकि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। अब सभी की नजर संसद के आगामी दिनों की कार्यवाही पर है, जहां यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है।

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