मनीला
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और आसियान (ASEAN) के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अत्यंत अशांत दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में क्षेत्रीय साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती तथा समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
वैश्विक संकटों का बढ़ रहा असर
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा भी इससे प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार पर निर्भर दुनिया के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका अहम
जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा से आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता रहा है। उन्होंने बताया कि आसियान आउटलुक ऑन इंडो-पैसिफिक (AOIP) और भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
कई देशों के विदेश मंत्रियों से हुई अहम मुलाकात
मनीला दौरे के दौरान डॉ. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं।
इन बैठकों में भारत-चीन संबंध, व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, क्षेत्रीय सुरक्षा, यूक्रेन संघर्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी रूस के समक्ष प्रमुखता से उठाया।
क्वाड और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी फोकस
विदेश मंत्री ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्षों के साथ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। इसके अलावा वह 23 जुलाई को पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) और आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की बैठकों में शामिल होकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों पर भारत का पक्ष रखेंगे।
भारत की रणनीतिक प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत अपने इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को मजबूत करने के साथ-साथ आसियान देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को नई गति देने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।








