कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: गोल्ड डिफेंड करने उतरे अरशद नदीम बुरी तरह फ्लॉप, टॉप-8 में भी नहीं बना पाए जगह

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अरशद नदीम का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो करते हुए फोटो, खराब प्रदर्शन के बाद टॉप-8 से बाहर

पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम एक बार फिर बड़े मंच पर धड़ाम से गिर गए। ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में उनका प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि वे फाइनल में टॉप-8 तक में जगह नहीं बना सके।

चार साल पहले बर्मिंघम में 90.18 मीटर की दूरी नापकर रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीतने वाले यही अरशद इस बार सिर्फ 77.41 मीटर तक ही पहुंच पाए। शुरुआत ही खराब रही — पहला थ्रो फाउल करार दिया गया। दूसरी कोशिश में उन्होंने अपना बेस्ट डिस्टेंस निकाला, लेकिन तब तक भारत के नीरज चोपड़ा और रोहित यादव समेत कई एथलीट 80 मीटर का आंकड़ा पार कर चुके थे। आखिरी मौके पर वापसी की कोशिश भी नाकाम रही, थ्रो महज 75.39 मीटर तक ही सिमट गया। नतीजा — नौवां स्थान और मेडल की दौड़ से बाहर।

दरअसल पेरिस ओलंपिक 2024 में गोल्ड जीतने के बाद अरशद का करियर लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। फिटनेस से जुड़ी दिक्कतों के चलते उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी, जिसकी वजह से वे काफी समय तक मैदान से दूर रहे। 2026 सीजन में वापसी के बाद भी उनका फॉर्म लौटता नहीं दिख रहा। महज दो हफ्ते पहले स्विट्जरलैंड में हुए एक इवेंट में भी वे 78.47 मीटर के थ्रो के साथ नौवें नंबर पर ही रह गए थे — यानी लगातार दूसरे बड़े टूर्नामेंट में उनका यही हाल रहा।

वहीं दूसरी तरफ फाइनल में असली रोमांच देखने को मिला। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर का दमदार थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारत के नीरज चोपड़ा 85.83 मीटर के साथ सिल्वर जीतने में सफल रहे, जबकि यशवीर सिंह ने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85.41 मीटर के थ्रो से ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

अब अरशद नदीम की निगाहें आने वाले एशियन गेम्स पर टिकी हैं, जहां उन्हें एक बार फिर नीरज चोपड़ा और पथिरागे जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों से भिड़ना होगा। सवाल यही है कि क्या वे अपनी 2022 वाली फॉर्म कभी वापस पा सकेंगे?

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