झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश रविवार को भी नहीं थमा। सरकार के साथ तीन दौर में करीब पांच घंटे तक चली मैराथन वार्ता भी पूरी तरह बेनतीजा रही, जिसके बाद छात्रों ने सोमवार यानी 10 अगस्त को पहले से घोषित ‘विधानसभा घेराव’ कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
सुबह 10 बजे से शुरू हुआ मार्च, टूटते गए बैरिकेड
आंदोलनकारी छात्र संगठनों की अपील पर हजारों की संख्या में छात्र सुबह पुरानी विधानसभा के पास जमा हुए और वहां से नई विधानसभा की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च शुरू किया। पुलिस ने रास्ते में कुल सात जगह बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने एक-एक कर छह बैरिकेड तोड़ दिए। जैसे ही छात्र सातवें और आखिरी बैरिकेड के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हैरानी की बात यह रही कि छात्र डरने की बजाय पानी में नाचने लगे और नारे लगाते रहे कि ‘और चलाओ, और चलाओ’।
रांची जिला प्रशासन ने घेराव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। नई विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में BNS की धारा 163 लागू कर दी गई थी और 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ IRB व QRT को भी तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘पैलेट गन’ की खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस्तेमाल हो रही बंदूकें दरअसल ‘पेंटबॉल गन’ हैं, जिनका मकसद सिर्फ उपद्रवियों की पहचान करना है।
सरकार का दावा- 98% मांगें मानी गईं, लेकिन CBI जांच पर अड़ा पेच
रविवार को हुई बातचीत में सरकार की तरफ से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हुए थे। सरकार ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, जिनमें 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और ACF परीक्षा रद्द करना तथा TDPL एजेंसी की परीक्षाओं की जांच शामिल है। लेकिन छात्र नेता JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अड़े रहे। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी, इसलिए राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने या सीधे CBI जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है। इसके बदले सरकार ने ED जांच, रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति और 90 दिन में रिपोर्ट के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव रखा, जिसे छात्रों ने पूरी तरह ठुकरा दिया।
डुमरी विधायक जयराम महतो प्रदर्शन में शामिल, छात्रों ने गोद में उठाया
दोपहर में डुमरी के विधायक जयराम महतो विधानसभा से बाहर निकलकर सीधे प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंच गए। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज सदन के भीतर और सड़क पर भी बुलंद करते रहेंगे। खुश होकर छात्रों ने उन्हें गोद में उठा लिया, जिसके बाद वे विधानसभा परिसर में जमीन पर बैठकर प्रदर्शन में शामिल हो गए।
इस दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला जब पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो कमजोर हालत में एंबुलेंस से मार्च में शामिल होने पहुंचे। छात्रों ने उन्हें अपने कंधों पर उठाया और फूल बरसाकर स्वागत किया।
BJP का भी विरोध प्रदर्शन, कई नेता हिरासत में
छात्र आंदोलन के समर्थन में भाजपा भी मैदान में उतर आई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की, जिसके चलते प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत के बाद मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “तानाशाही” करार दिया और कहा कि झारखंड के छात्रों को न्याय दिलाने तक भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा।
JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा
आंदोलन के बीच एक बड़ा घटनाक्रम यह भी रहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों — अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनिमा हांसदा — ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। डॉ. अजीता भट्टाचार्य से इसी दिन पूछताछ भी होनी थी।
छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक TDPL की सभी परीक्षाएं और JSSC-CGL परीक्षा रद्द नहीं होती और CBI जांच का लिखित आदेश जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।








