पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के एक बयान ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। दिल्ली में दिए गए बयान में रमजान ने साफ कह दिया कि PoK भारत का हिस्सा नहीं बल्कि अलग देश है, इसलिए वहां के हालातों से भारत का कोई सीधा वास्ता नहीं बनता।
सांसद ने आगे कहा कि PoK में रहने वाले लोगों की तकलीफों पर बोलना उनकी जिम्मेदारी नहीं है, क्योंकि उन्हें भारतीय संसद में भेजने वाले वहां के नागरिक नहीं हैं। उनके मुताबिक, उस क्षेत्र के मामलों को देखना पूरी तरह पाकिस्तान सरकार का काम है। गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस फारुक अब्दुल्ला की पार्टी है और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला फिलहाल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं।
ऐसे वक्त आया बयान जब PoK सुलग रहा है
गौर करने वाली बात यह है कि यह बयान ठीक उस दौर में आया है जब सीमा पार PoK में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) महंगाई, प्रशासनिक फैसलों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रही है। इन प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की सख्ती, कुछ नागरिकों की मौत और इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने जैसे आरोप भी सामने आ चुके हैं।
भारत ने चुनावी प्रक्रिया को बताया दिखावा
इसी बीच PoK में हुए चुनाव के दूसरे चरण पर भारत सरकार की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वहां हुई चुनावी कवायद को महज दिखावा करार देते हुए कहा कि इससे जमीनी हालात नहीं बदलते। मंत्रालय का आरोप था कि पाकिस्तान लोगों की नाराजगी का जवाब दमन और सख्ती से दे रहा है, न कि उनकी मांगें सुनकर।
महबूबा मुफ्ती ने भी उठाई आवाज
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी हाल में इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी। उनका कहना था कि नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले लोगों को भी शांति और सम्मान से जीने का उतना ही हक है, जितना किसी और को। उन्होंने पाकिस्तान पर वहां की प्रतिनिधि संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
विदेशी मीडिया पर पाबंदी की खबरें
इस बीच खबरें यह भी आ रही हैं कि पाकिस्तान ने PoK में उपजे तनाव के बीच कुछ डिजिटल न्यूज पोर्टल्स और अल जजीरा इंग्लिश की पहुंच सीमित कर दी है, हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन की तरफ से इसकी औपचारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। ऐसे संवेदनशील माहौल में NC सांसद का यह बयान आने वाले दिनों में और सियासी बहस को जन्म दे सकता है।








