बढ़ती आबादी के साथ खाद्यान्न की जरूरतें तो पूरी हो रही हैं, लेकिन अंधाधुंध और असंतुलित रासायनिक खादों के प्रयोग से हमारे खेतों की सेहत व उर्वरा शक्ति गंभीर संकट में है। यदि समय रहते किसान सचेत न हुए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन बंजर हो जाएगी। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र, रामपुर के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. मयंक कुमार राय ने चमरौवा ब्लॉक के चिकटी गाँव में कही। वे यहाँ कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सघन खेत बचाओ अभियान एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत एक दिवसीय किसान जागरूकता चौपाल को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।चौपाल में किसानों को ‘बैलेंस्ड फर्टिलाइजर’ (संतुलित उर्वरक) के महत्व को समझाते हुए डॉ. मयंक कुमार राय ने कहा कि अक्सर किसान बिना जरूरत के केवल यूरिया और डीएपी का अधिक इस्तेमाल करते हैं। इससे न सिर्फ खेती की लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच (सॉइल हेल्थ कार्ड) अवश्य करवाएं और रिपोर्ट में दी गई संस्तुति के आधार पर ही नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश का संतुलित अनुपात में प्रयोग करें! उपनिदेशक कृषि श्री राम किशन सिंह ने चौपाल में मौजूद किसानों को कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने भूमि संरक्षण और कुशल जल प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि गिरता भूजल स्तर भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर (टपकदार व फव्वारा) सिंचाई पद्धति अपनानी चाहिए, जिसके लिए सरकार भारी अनुदान दे रही है।
जिला उद्यान अधिकारी श्री अजय कुमार ने किसानों की आय दोगुनी करने का मंत्र देते हुए ‘कृषि विविधीकरण’ पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र में फंसे रहने के बजाय किसानों को अपनी कुछ जमीन पर नकदी फसलें जैसे मौसमी सब्जियां, फल और औषधीय पौधों की बागवानी शुरू करनी चाहिए। उद्यान विभाग इसके लिए उत्तम गुणवत्ता के बीज और पौधे उपलब्ध करा रहा है।
खेत बचाओ, कल बचाओ — चिकटी में गूंजा किसान जागरूकता का संदेश
पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अनुज बंसल ने किसानों को फसलों में लगने वाली बीमारियों और मित्र कीटों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हर कीड़ा फसल का दुश्मन नहीं होता। रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव से मित्र कीट मर जाते हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के सिद्धांतों को साझा करते हुए नीम का तेल, पंचगव्य और जीवामृत जैसे पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाने की तकनीकी जानकारी दी।
किसानों की शंकाओं का मौके पर समाधान
चौपाल के अंतिम सत्र में ‘प्रश्नकाल’ का आयोजन हुआ, जिसमें चिकटी और आसपास के गाँवों से आए दर्जनों प्रगतिशील किसानों ने अपनी फसलों में लग रहे रोगों, खाद की सही मात्रा और सरकारी योजनाओं के पंजीकरण से जुड़े सवाल पूछे। वैज्ञानिकों की टीम ने मौके पर ही सभी किसानों की समस्याओं का व्यावहारिक और तकनीकी समाधान किया। कृषि विभाग के स्थानीय फील्ड स्टाफ ने किसानों से इस मानसून सीजन में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को शत-प्रतिशत अपनाने का संकल्प दिलाया।





