काठमांडू।
भारत और नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुई पहली सीधी कमर्शियल मालगाड़ी सफलतापूर्वक नेपाल के विराटनगर स्थित नेपाल कस्टम्स यार्ड पहुंच गई। इस उपलब्धि को दोनों देशों के बीच सीमा पार व्यापार और रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। भारतीय दूतावास ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि नई कार्गो ट्रेन सेवा से व्यापार तेज होगा और परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
भारत-नेपाल रेल कनेक्टिविटी को मिला नया विस्तार
करीब 40 वैगनों वाली यह मालगाड़ी कोलकाता बंदरगाह से रवाना होकर भारत के जोगबनी सीमा के रास्ते नेपाल पहुंची। इसमें कैनोला अनाज (तिलहन) की बड़ी खेप भेजी गई। यह सेवा भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट फ्रेमवर्क के संशोधित प्रोटोकॉल लागू होने के बाद संचालित पहली सीधी व्यावसायिक कार्गो ट्रेन है।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा लाभ
नई रेल सेवा शुरू होने से दोनों देशों के बीच माल परिवहन पहले की तुलना में अधिक तेज और किफायती होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क मार्ग की बजाय सीधे रेल मार्ग से माल भेजे जाने पर लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। इसके अलावा माल की लोडिंग-अनलोडिंग में कम समय लगेगा, बंदरगाह पर विलंब शुल्क (डेमरेज) घटेगा और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी।
भारतीय दूतावास ने जताई खुशी
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसे भारत-नेपाल व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए एक अहम उपलब्धि बताया। दूतावास ने कहा कि नवंबर 2025 में भारत-नेपाल पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के बाद यह पहली सीधी कमर्शियल कार्गो ट्रेन है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देगी।
आर्थिक साझेदारी होगी और मजबूत
नई रेल सेवा से नेपाल के आयातकों को तेज और सस्ती परिवहन सुविधा मिलेगी, जबकि भारत के निर्यातकों के लिए भी सामान भेजना आसान होगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है और सीमा पार आपूर्ति प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।
आने वाले समय में बढ़ेगा कार्गो नेटवर्क
भारत और नेपाल भविष्य में इस रेल मार्ग के जरिए अन्य आवश्यक वस्तुओं और बल्क कार्गो की नियमित ढुलाई की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगी।








