सुरक्षित वैश्विक व्यापार के लिए नियम-आधारित व्यवस्था जरूरी: भारत

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हुआ। विदेश मंत्रालय, भारत के सर्वोच्च न्यायालय और यूएनसीआईटीआरएएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में वैश्विक व्यापार कानूनों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने कहा कि सुरक्षित और स्थिर वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए नियम-आधारित कानूनी ढांचा बेहद आवश्यक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों के विकास और आधुनिकीकरण में भारत की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से पारदर्शी और भरोसेमंद वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थक रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि यह सम्मेलन यूएनसीआईटीआरएएल के साथ भारत के सहयोग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों के विकास में उसकी भूमिका पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए न्यायविदों, कानूनी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। तीन दिनों तक चले विचार-विमर्श में डिजिटल अर्थव्यवस्था, सीमा-पार दिवाला प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इससे पहले उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए नियम-आधारित कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया था। समापन सत्र में सचिव सुधाकर दलेला ने इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भविष्य की वैश्विक व्यापार व्यवस्था अधिक समावेशी, पारदर्शी और विकासशील देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।

सम्मेलन के सफल आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून और विवाद समाधान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया।

रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी

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