रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन के केंद्र में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो हैं, जिन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में आमरण अनशन शुरू किया। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
कौन हैं देवेंद्रनाथ महतो?
देवेंद्रनाथ महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं। वे लंबे समय से राज्य में शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और खुद भी आमरण अनशन पर बैठ गए।
क्यों शुरू हुआ आंदोलन?
छात्रों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कुछ भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
इन्हीं मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। देवेंद्रनाथ महतो ने भी इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आमरण अनशन शुरू किया।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी करना और युवाओं को समय पर नियुक्ति देना शामिल है। कई छात्र विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की भी मांग कर रहे हैं।
सरकार पर बढ़ा दबाव
छात्रों के आंदोलन और देवेंद्रनाथ महतो के आमरण अनशन के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आगे क्या?
अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि सरकार छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, लेकिन समाधान में देरी होने पर आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।








