पंजाब चुनाव से पहले राघव चड्ढा की पीएम मोदी से मुलाकात, सियासी हलकों में तेज हुई चर्चा

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राघव चड्ढा और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात

पंजाब की सियासत में एक बड़ी हलचल तब देखने को मिली जब भाजपा सांसद राघव चड्ढा शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात की तस्वीरें राघव चड्ढा ने खुद अपने ‘X’ अकाउंट पर साझा कीं और इसे अपने लिए एक “यादगार सुबह” करार दिया। गौर करने वाली बात यह है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का ही वक्त बचा है, ऐसे में इस भेंट के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की थी, जिसके चलते कयासों का दौर और तेज हो गया है।

गौरतलब है कि राघव चड्ढा इसी साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी छोड़कर छह अन्य सांसदों संग भाजपा में शामिल हुए थे। मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई, इस पर उन्होंने खुलकर कुछ नहीं बताया, बस इतना कहा कि यह एक “ज्ञानवर्धक बातचीत” रही।

चड्ढा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का मौका पाकर वे खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक विस्तृत और सीखने लायक बातचीत बताते हुए प्रधानमंत्री का उनके कीमती समय, मार्गदर्शन और सलाह के लिए आभार भी जताया।

आखिर इस मुलाकात के पीछे वजह क्या है?

दरअसल भाजपा पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है और राज्य में अपनी सियासी सक्रियता को नई रफ्तार दे रही है। अगले साल पंजाब में चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करने वाले चड्ढा का पैतृक नाता जालंधर से है, जिस वजह से पार्टी उन्हें चुनावी अभियान में कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है।

बता दें कि चड्ढा शुरू से ही आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन अप्रैल महीने में उन्होंने पार्टी को बड़ा झटका देते हुए छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था। एक समय पंजाब में AAP का ‘असली चेहरा’ माने जाने वाले चड्ढा का यूं पार्टी छोड़ना आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी क्षति साबित हुआ, खासकर तब जब पंजाब देश का इकलौता राज्य है जहां फिलहाल AAP सत्ता में है।

भाजपा में शामिल होने के बाद अब चड्ढा को पार्टी में कोई बड़ी भूमिका मिलने की चर्चा है। पंजाब की चुनावी राजनीति की गहरी समझ रखने वाले चड्ढा की शहरी छवि भाजपा को अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे प्रमुख शहरों में अपना जनाधार मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है। खासतौर से अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा को राज्य के कारोबारी वर्ग और मध्यम वर्ग के मतदाताओं में पैठ बनाने में दिक्कतें आई हैं, ऐसे में चड्ढा की भूमिका अहम मानी जा रही है।

दिलचस्प यह भी है कि चड्ढा से मिलने से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल से भी मुलाकात की थी। इसी वजह से यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि भाजपा अपने पुराने गठबंधन सहयोगियों से रिश्ते फिर से सुधारने की दिशा में सोच रही है। आम आदमी पार्टी के उभार के बाद कमजोर पड़ चुका अकाली दल भी भाजपा से नजदीकी बढ़ाने का इच्छुक दिख रहा है — पार्टी अब सिमटकर महज तीन विधायकों और एक सांसद तक रह गई है।

पंजाब की सियासत में लगातार बदल रहे समीकरणों के बीच सवाल यही है कि अगर चड्ढा को कोई अहम जिम्मेदारी मिलती है, तो क्या वे भाजपा की चुनावी किस्मत बदलने में कामयाब हो पाएंगे? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

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